10+ भोपाल में घूमने की जगह | झीलों के शहर में आकर्षक स्थान

झीलों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध भोपाल में घूमने के लिए अनेकों पर्यटन स्थल मौजूद है। भोपाल शहर में 50 से 60 किलोमीटर के दायरे में अनेक दर्शनीय स्थल जैसे शौर्य स्मारक, भीम वेटिका, भोपाल का सांची स्तूप, बड़ा तालाब झील जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मौजूद हैं जो भोपाल में घूमने आने वालो को अपनी ओर आकर्षित करते है। भोपाल शहर में फैली हरियाली और सुंदरता पर्यटकों का दिल जीत लेती है। आज हम आपको भोपाल में घूमने की जगह (Bhopal Me Ghumne Ki Jagah) से अवगत कराने वाले हैं।

Bhopal me ghumne ki jagah

जैसा की आप जानते हैं कि भारत का हृदय स्थल मध्य प्रदेश जिसकी राजधानी भोपाल है। प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण भोपाल अनेकों टूरिस्ट प्लेस के कारण प्रसिद्ध है। भोपाल में घूमने के लिए प्रति वर्ष लाखों की संख्या में देश विदेश से पर्यटक आते हैं। भोपाल की झीलों में नाव की सवारी में घूमना यात्रा के शानदार अनुभवों में से एक है।


भोपाल में घूमने की जगह | Bhopal Me Ghumne Ki Jagah


भोपाल शहर के बारे में जानकारी (Short Information About Bhopal)

  1. राजा भोज की नगरी भोपाल को झीलों का शहर कहा जाता है क्योंकि भोपाल में बड़ी संख्या में छोटे और बड़े तालाब मौजूद हैं।भोपाल मध्यप्रदेश राज्य की राजधानी है। भोपाल में भारत का इकलौता भारतीय वन प्रबंधन संस्थान है।
  2. भोपाल शहर को 1010 से 1055 ई में परमार राजा भोज ने बसाया था। भोपाल शहर को प्राचीन काल में भूपाल के नाम से जाना जाता था। भोपाल की प्रथम महिला शासिका कुदसिया थी उसके बाद उसकी पुत्री शाहजहां वे सिकंदर बेगम ने भोपाल पर शासन किया।
  3. भोपाल शहर 1984 में देश और दुनियां में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना था। जब एक फैक्टरी यूनियन कार्बाइड से मिथाइल आइसोसायनाइड गैसे लीक हो गई थी जिसमे लगभग 20000 से ज्यादा लोगो ने अपनी जान गवां दिया था।
  4. भोपाल में मानव निर्मित दो झील है। छोटी झील और बड़ी झील जिसका निर्माण राजा भोज ने करवाया था।


1. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (Indira Gandhi Manav Sangrahalaya)

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल शहर में श्यामला पहाड़ियों पर लगभग 200 एकड़ के विशाल क्षेत्र में बना हुआ है। यह भोपाल में घूमने के लिए एकदम मस्त जगह के रूप में शुमार है। संग्रहालय में भारत की प्राचीन संस्कृति को देख सकते हैं। मानव संग्रहालय मनुष्य जाती के विज्ञान को दर्शाता भारत का सबसे बड़ा संग्रहालय है। जिसमे मनुष्य जीवन काल की उत्पत्ति कैसे मनुष्य पाषाण काल से आधुनिकता की तरफ विकसित हुआ साथ ही जीवन यापन के लिए कैसे नए नए विचारों और तरीकों का इजात किया और जीवन काल के चक्र को संग्रहालय में देख सकते हैं।

Bhopal me ghumne ki jagah

चित्रों और मूर्तियों के द्वारा बताया गया है कि कैसे प्राचीन काल में मनुष्य का रहन सहन था और मानव पाषाण काल में कैसे भोजन ग्रहण करता था और जैसे जैसे समय आगे बढ़ता गया आग का अविष्कार और खेती के आधुनिक तरीके अजमाने लगा। म्यूज़ियम के अंदर 8 Open Air Exibition और 12 गैलरी बनाई गई हैं। म्यूज़ियम के अंदर फैली हरियाली बोर नहीं होने देगी।

एंट्री शुल्क : म्यूज़ियम में मानव जीवन की उत्पत्ति और इतिहास को जानने के लिए 50 रूपए टिकट है।


2. सैर सपाटा (Sair Sapata Bhopal)

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सैर सपाटा भोपाल का लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट है। सैर सपाटा एक तरह से गार्डेन है जहां मनोरंजन करने के लिए अनेकों साधन उपलब्ध हैं। पार्क के अंदर बोटिंग, झूला, बंजी जंपिंग में मनोरंजन कर सकते हैं। पार्क के अंदर छोटी सी टॉय ट्रेन भी चलती है जिसमें बैठकर पार्क की सैर करते हुए भरपूर आनंद ले सकते हैं। पार्क के अंदर चारो ओर फैली हरियाली और सुंदर फूलों के बीच अपना कीमती समय गुजार सकते हैं। कपल्स के घूमने के लिए सबसे आदर्श पार्क है। भोपाल जाने वाले अधिकतर पर्यटक सैर सपाटे में घूमने के लिए जरूर जाते हैं। सैर सपाटे के अंदर प्राकृतिक मनोहर दृश्य देखने को मिलते हैं।

सैर सपाटा का पता : भोपाल स्टेशन से 6 किमी दूर पड़ता है। पहुंचने के लिए सबसे आसान माध्यम ऑटो रिक्शा है।

Ticket Price : सैर सपाटा में घूमने के लिए 30 रूपए का प्रवेश शुल्क लिया जाता है।


3. People Mall Bhopal

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People मॉल भोपाल का बहुत ही खुबसूरत मॉल है। मॉल को बहुत ही अच्छे तरीके से डिजाइन किया गया है। मॉल के अंदर बच्चों के खेलने लायक बहुत से गेमिंग जोन बने हुए है जहां कार राइडिंग और बाइक राइडिंग का मजा ले सकते हैं। मॉल के अंदर सात अजूबे देखने को मिलते हैं जिन्हें हुबहू बनाया गया है। मॉल के अंदर रोमन गार्डेन, ताजमहल, इंडिया गेट, दिल्ली का लाल किला, ताज होटल, एफिल टॉवर, रेट्रो पार्क देखने को मिलते हैं। अन्दर घूमते हुए फ़ोटो शूट करवा सकते हैं। कपल्स के घूमने लायक बहुत ही बढ़िया मॉल है। मॉल के अंदर ऊंट की सवारी और टॉय ट्रेन का भी आनंद उठा सकते हैं। मॉल में खानें पीने के बहुत से रेस्टोरेंट है जहां भोपाल के क्षेत्रीय भोजन का स्वाद ले सकते हैं।

मॉल घूमने का टिकट : मॉल के अंदर घूमने के लिए 60 रूपए का टिकट लगता है।


4. बिरला मंदिर भोपाल

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भोपाल में बिड़ला मंदिर का निर्माण बिरला परिवार द्वारा करवाया गया था। बिरला मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। बिरला मंदिर का उद्घाटन राष्ट्र पिता महात्मा गांधी ने किया था जिसे वजह से मंदिर और लोकप्रिय माना जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी और दीपावली पर्व पर दर्शन करने के लिए लोगों की बहुत भीड़ लगती है। बिरला मंदिर के बगल में ही 1971 में निर्मित GP बिरला संग्रहालय स्थित है जहां 2वी शताब्दी से लेकर 16वी शताब्दी के बीच की पेंटिंग, मूर्तियां, हस्तलिपि देख सकते हैं। प्रत्येक सोमवार को बिरला संग्रहालय बंद रहता है।

मंदिर Timing : मंदिर के कपाट सुबह 7 बजे खोले जाते हैं और रात 10 बजे बंद कर दिए जाते हैं।


5. भोपाल की मोती मस्जिद (Moti Masjid Bhopal)

मोती मस्जिद भोपाल में लोगो की पसंदीदा जगह के रूप में काफी प्रसिद्ध है। मस्जिद का निर्माण सिकंदर जहां बेगम ने 1860 में करवाया था। सिकंदर जहां बेगम कुदसिया बेगम की बेटी थी। मोती मस्जिद का निर्माण संगमरमर के सफेद पत्थरों और लाल पत्थर द्वारा करवाया गया था।

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मस्जिद का निर्माण दिल्ली की जामा मस्जिद की प्रेरणा लेकर करवाया गया था। मोती मस्ज़िद का आकार जामा मस्जिद से छोटा है। मुगल काल की वास्तुशैली में बनी इमारत पर्यटकों के घूमने लायक सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है।


6. भोपाल का शौकत महल (Shaukat Mahal Bhopal)

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शौकत महल भोपाल शहर के बिलकुल बीचोबीच स्थित है। शौकत महल का निर्माण 1830 में भोपाल की महिला शासिका सिकंदर बेगम के शासन काल में करवाया गया था। शौकत महल की देखरेख न हो पाने के कारण धीरे धीरे यह महल खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। शौकत महल में घूमने के लिए भारत के विभिन्न शहरों से लोग प्रतिदिन हजारों की संख्या में जाते हैं। शौकत महल इस्लामी वास्तुकला में बना पर्यटकों को अपनी ओर लुभाता है।

 

7. बड़ा तालाब झील भोपाल - (Bada Talab Bhopal)

भोपाल को झीलों का शहर कहा जाता है। भोपाल में अनेकों सुंदर झीलें देखने के लिए मिल जायेंगी जिसमे सबसे प्रसिद्ध मानव निर्मित झील उप्पर झील जिसे क्षेत्रीय लोग भोज ताल या बड़ा तालाब नाम से पुकारते है। छोटी और बड़ी झील का निर्माण राजा भोज ने करवाया था। अप्पर झील में घूमना बिलकुल फ्री है लेकिन यदि आप बोटिंग करते हैं तो उसके लिए अलग से चार्ज देने होंगे।

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झील के पास ही कमला पार्क हैं जहां पर आप बैठ कर आराम कर सकते हैं और बहते पानी में बोटिंग और नाव में बैठ कर सैर का मजा ले सकते है। झील के किनारे बहुत से रेस्टोरेंट बने हुए जो जायकेदार भोजन उपलब्ध कराते हैं।

Upper Lake Timing : झील में घूमने जाने का समय सुबह 6 बजे से शाम को 7 बजे तक रहता है। शाम को सूर्यास्त के समय अप्पर लेक में घूमने के लिए ज्यादा संख्या में पर्यटक जाते हैं।

 

8. भोपाल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान | Van Vihar Rashtriya Udyan

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का निर्माण 1983 में करवाया गया था। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में मध्य भारत का सबसे ज्यादा पसन्द किया जाने वाला पर्यटन स्थल है। राष्ट्रीय उद्यान में आपको शेर, टाईगर, नीलगाय, सांभर, शाही, जंगली सुअर, चीतल, भालू, घड़ियाल, लकड़बग्घा जैसे जंगली पशुओं और जंतुओं को देखने का मौका मिलेगा। अंदर तितली घर भी बनाया गया है जहां विभिन्न प्रजाति की रंग बिरंगी तितलियां देखने को मिलती हैं।

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पार्क के अंदर सर्प घर भी बना हुआ है जहां जहरीले सांप कोबरा, अजगर और विभिन्न तरह के सांप देख सकते हैं। यह राष्ट्रीय उद्यान शुक्रवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी सभी दिनों में खुला रहता है। बच्चों और परिवार के साथ घूमने की सर्वोत्तम जगह है। 

वन विहार में घूमने का टिकट : वन विहार में घूमने दो पहिया वाहन से भी जा सकते हैं। दो पहिया वाहन से घूमने के लिए 60 रूपए का टिकट शुल्क लगता है। राष्ट्रिय उद्यान में पैदल घूमने के लिए 20 रूपए का शुल्क लिया जाता है। यदि निजी कार से घूमना चाहते हैं तो उसके लिए 400 रूपए देने होंगे।


9. शौर्य स्मारक भोपाल (Shaurya Smarak)

शौर्य स्मारक भोपाल शहर में अरेरा पहाड़ी क्षेत्र में 12 एकड़ की जगह में बना हुआ है। शौर्य स्मारक आंगतुक के लिए देश भक्ति का परिचय कराता है। शौर्य स्मारक का निर्माण देश के लिए शहीद होने वाले बीर जवानों की याद में बनाया गया था। स्मारक के अन्दर 8 गैलरी बनाई गई हैं जिसमें युद्ध के टैंक, युद्ध के दौरान सैनिक कैसे लड़ाई लड़ते हैं सब चीज को मूर्तियों की सहायता से दर्शाया गया है।

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स्मारक परिसर में पत्थरों से बना 62 फूट ऊंचा स्तंभ स्थित है जिसे भारतीय सेना के सम्मान में बनाया गया है। शौर्य स्मारक को देखकर अपने मन में देश भक्ति की भावना फूट फूट कर बहने लगेगी 14 अक्तूबर 2016 को भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के कर कमलों द्वारा इस स्मारक का उद्घाटन किया गया था।

शौर्य स्मारक एंट्री शुल्क : शौर्य स्मारक की एंट्री टिकट मात्र 10 रूपए की है।


10. ताज उल मस्जिद | Taj Ul Masjid Bhopal

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मुगल वास्तुशैली में बनी ताज उल मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक और एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मस्ज़िद में से एक है। मस्ज़िद इतनी बड़ी है की 175000 लोग एक साथ बैठकर नमाज़ अदा कर सकते हैं। मस्जिद का निर्माण भोपाल की महिला शासिका शाहजहां सिकंदर बेगम के शासन काल के दौरान करवाया गया था लेकिन धन के अभाव के कारण मस्जिद का निर्माण कार्य पूरा न हो सका। बाद में ताज उल मस्जिद का निर्माण बहादुर शाह ज़फ़र द्वारा 19वी शताब्दी में करवाया गया था। ताज उल मस्जिद की डिज़ाइन आगरा के ताजमहल जैसी देखने को मिलती है। मस्ज़िद में तीन गुम्बद और आगे खड़े स्तंभ ताजमहल की झलक प्रस्तुत करते हुए दिखाई देते हैं। मस्जिद की वास्तुकला घूमने जाने वाले पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देगी।

मस्जिद में घूमने का समय : ताज उल मस्जिद में घूमने के लिए शुक्रवार को छोड़कर सभी दिन जा सकते हैं। जुमा की नमाज़ के कारण शुक्रवार के दिन 12 बजे से 3 बजे तक मस्ज़िद पर्यटकों के लिए बंद रहती है।


11. भोजेश्वर मंदिर भोपाल (Bhoje shwar Temple)

भोजेश्वर मंदिर भोपाल से 30 किलोमीटर की दूर बेतवा नदी के किनारे भोजपुर गांव में स्थित है। मंदिर का निर्माण परमार वंश के राजा भोज ने 11वी शताब्दी में करवाया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर के अंदर 3 मीटर लंबा शिवलिंग को स्थापित किया गया है। भोजेश्वर मंदिर को गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर की संज्ञा दी जाती है।

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सोमनाथ मंदिर की तरह ही इस मंदिर की रूपरेखा तैयार की गई है। भोजेश्वर मंदिर हिंदुओ का प्रमुख दर्शनीय मंदिर है। शिवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर में दर्शन करने और जल चढ़ाने के लिए भक्तो की बहुत भीड़ उमड़ती है। शिवरात्रि के दिन मंदिर परिसर में मेले का आयोजन किया जाता हैं। जिसे देखने के लिए दूर दूर से भक्त आते हैं।


12. भोपाल की भीम वेटिका गुफाएं (BhimBetka Ki Gufa)

भोपाल शहर से लगभग 47 किलोमीटर की दूर विंध्याचल पर्वत पर स्थित भीम वेटिका गुफाएं ऐतिहासिक काल के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर देती है। भीम वेटिका गुफाओं का संबंध महाभारत काल से भी माना जाता है कहते है प्राचीन गुफाओं में पांडवो का निवास था इसलिए इस गुफा को भीम वेटिका गुफा के नाम से जाना जाता है। भीम वेटिका की खोज डॉ विष्णु श्रीधर ने 1957-58 के बीच में की थी।

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गुफाओं में अनेकों प्राचीन काल के चित्र, नव पाषाण काल से संबंधित स्थल देखने को मिल जायेंगे। गुफाओं में हजारों साल पहले मनुष्यों के रहने के साबूत मिले है। गुफ़ा की दीवारों में पत्थरो पर बनी अदभुत चित्रकारी दर्शनीय है। भीम वेटिका गुफाओ से 500 मीटर की दूरी पर भगवान शिव और माता वैष्णो देवी का प्राचीन मंदिर बना हुआ है जिसका निर्माण पहाड़ों को काटकर किया गया है। भीम वेटिका गुफा को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल के रूप की सूची में घोषित किया है।

Cave Visit Timing : भीम वेटिका गुफा देखने जाने के लिए सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे के बीच में गुफा में जा सकते हैं। भीम वेटिका गुफाओं को देखने के लिए निजी वाहन द्वारा पहुंचना सबसे सही रहता है क्योंकि निश्चित स्थान पर बस से उतरने के बाद तीन किमी पैदल जंगल से होते हुए रास्ता गुजरता है वन्य जीव होने के कारण पैदल चलकर जाने की अनुमति नहीं रहती है। यदि निजी वाहन से नही जाना चाहते तो भोपाल से ऑटो या टैक्सी बुक करके पहुंच सकते हैं।

 

13. सांची स्तूप भोपाल

भोपाल का सांची स्तूप मध्यप्रदेश के रायशीन जिले में स्थित है। सांची स्तूप की भव्यता पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। सांची स्तूप का निर्माण मौर्य वंश के सम्राट अशोक के द्वारा तीसरी शताब्दी में करवाया गया था। सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया था।बौद्ध धर्म का प्रचार और प्रसार करने के लिए इस स्तूप का निर्माण करवाया था। सांची में कुल मिलाकर 93 स्तूप है जिनमें तीन स्तूप सबसे बड़े हैं। सांची स्तूप की खोज 1818 में अंग्रेज अधिकारी जनरल टेलोर ने शिकार करने के दौरान की थी। शिकार करने के दौरान बीरान धरोहर को देखा और फिर लोगों का ध्यान सांची के स्तूप की तरफ गया।

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सांची स्तूप में भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित रोचक तथ्य जानने का मौका मिलेगा। प्रत्येक वर्ष नवंबर के आखिरी सप्ताह में सांची में मेला लगता है जहां बौद्ध भगवान की अस्थियों का पूजन और दर्शन किया जाता है। स्तूप में ब्रेल लिपि में इतिहास को लिखा गया है। प्रत्येक शाम को सांची स्तूप परिसर में लाईट और साउंड का शो होता है। वर्तमान में 200 रूपए के नोट पर सांची स्तूप को देख सकते हैं। भारत का राष्ट्रिय सिंबल सत्य मेव जयते सांची स्तूप से ही लिया गया है। ऐतिहासिक स्थल को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। सांची स्तूप की देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अंतर्गत किया जाता है।

सांची स्तूप टिकट : विश्व धरोहर स्थल को देखने के लिए भारतीय नागरिक से 40 रूपए और विदेशी नागरिकों से 600 रूपए का टिकट लगता है।

Timing : सांची स्तूप में घूमने जाने के लिए आप सुबह 9 बजे सेे शाम 5 बजे के बीच में जा सकते हैं।

सांची कैसे पहुंचे? : भोपाल शहर से सांची 50 किमी की दूरी पर पड़ता है। भोपाल से सांची के लिए बस और ट्रेन की सुविधा उपलब्ध है। भोपाल रेलवे स्टेशन से सांची के लिए दिन में नियमित अंतराल के बाद ट्रेन चलती रहती है।


भोपाल के प्रसिद्ध मंदिर

  • खटला पुरा मंदिर - खटलापुरा निचली झील, जहांगीराबाद
  • इस्कॉन मंदिर - हरे कृष्ण भूमि पतेलनगर 
  • गुफ़ा मंदिर - नयापुरा ईदगाह हिल्स
  • श्री मध्य स्वामी मलाई मंदिर - Arera Colony भोपाल 
  • मनुआ भान की टेकरी - सन सिटी, लाल घाटी


भोपाल की सस्ती मार्केट

  • चौक बाज़ार
  • न्यू मार्केट
  • VIP Road


भोपाल घूमने जाने का सबसे अच्छा मौसम (Best Time to Visit Bhopal)

भोपाल घूमने जाने की योजना बना रहे हैं तो आपको भोपाल में घूमने जाने का सबसे अच्छा मौसम पता होना चाहिए ताकि घूमने के किसी तरह की परेशानी का सामना नही करना पड़े। भोपाल में घूमने के लिए सबसे अच्छा मौसम सितंबर से लेकर मार्च तक के बीच का माना जाता है।

सर्दियों में भोपाल का मौसम घूमने के लिए सुखदाई रहता है। सर्दियों में आप गर्म कपड़े पहन कर भोपाल घूम सकते हैं। जुलाई से अगस्त तक भोपाल में बारिश का मौसम रहता है इस दौरान भोपाल में घूमने जाने से बचना चाहिए।

 

भोपाल कैसे पहुंचे? (How To Reach Bhopal)

लेख में हम आपको भोपाल पहुंचने के सबसे आसान रास्ता के बारे में जानकारी देंगे ताकि आसानी से भोपाल पहुंचा जा सके।

वायुमार्ग द्वारा भोपाल कैसे पहुंचे?

भोपाल हवाई मार्ग द्वारा भारत के अनेक शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। भोपाल हवाई जहाज से पहुंचना बहुत ही आसान है। यदि आप हवाई जहाज से भोपाल पहुंचना चाहते हैं तो भोपाल शहर से 15 किलोमीटर की दूरी पर राजा भोज हवाई अड्डा स्थित है। भारत के शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद, इंदौर, और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख शहरों में नियमित घरेलू उड़ान सेवाऐं संचालित होती रहती हैं।


ट्रेन से भोपाल कैसे जाएं?

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी होने के कारण भोपाल का रानी कमलापति रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहर आगरा, कानपुर, झांसी, बैंगलोर, चेन्नई, लखनऊ, पुणे, कोलकाता जैसे शहरों से रेल मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यह रेलवे स्टेशन दिल्ली चेन्नई मार्ग पर पड़ता है। दिल्ली से डायरेक्ट शताब्दी एक्सप्रेस नियमित रूप से चलती रहती है।


 बस से भोपाल कैसे पहुंचे?

सड़क मार्ग द्वारा भोपाल पहुंचने के लिए बहुत आसान है। आप अपने निजी वाहन या कार से भोपाल पहुंच सकते हैं। यदि आपके शहर से भोपाल 200 से 300 किलोमीटर की दूरी पर है तब आप अपने निजी वाहन से भोपाल जाएं तो बेहतर है।

यदि आप दूर राज्य से भोपाल जाना चाहते हैं तो भोपाल के पड़ोसी राज्यों के शहरो से राज्य परिवहन की बसे नियमित रूप से चलती रहती है। भोपाल के नजदीक शहर लखनऊ, कानपुर, इंदौर, जबलपुर, और झांसी से बस द्वारा पहुंच सकते हैं।


भोपाल में किराए पर वाहन

भोपाल के पर्यटान स्थलों का भ्रमण करने के लिए दो पहिया वाहन या साइकिल द्वारा भ्रमण करना सबसे सुविधाजनक रहता है क्योंकि थोड़ी थोड़ी दूर तक जाने के लिए वाहन का किराया अधिक रहता है। किराए पर वाहन रेलवे स्टेशन के पास ले सकते हैं। वाहन किराए पर लेने के लिए वैद्य ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड होना अनिवार्य है।


भोपाल में रुकने लायक जगह (Bhopal Me Rukne ki Jagah)

भोपाल में रुकने के लिए आपको कम बजट से लेकर महंगे बजट तक के होटल मिल जायेंगे। जिसमे आपको 800 रुपए से लेकर 1500 रुपए के बीच 24 घंटे के हिसाब से होटल में रहने के लिए रूम मिल जायेगा। आप चाहें तो होटल ऑनलाइन खोजकर बुक कर सकते हैं। भोपाल रेलवे स्टेशन के बाहर और Upper Lake के पास ठहरने के अनेकों होटल बने हुए हैं।


भोपाल का मशहूर भोजन क्या है?| Bhopal Famous Food 

अगर आपको तरह तरह के जायके का स्वाद लेना है तो भोपाल शहर जरूर जाएं भोपाल में हर चौराहे और नुक्कड़ पर आपको खाने के लिए कुछ न कुछ जरूर मिल जायेगा। जिसमे चटपटा खाने के लिए पोहा, लिट्टी चोखा बाटी, टिक्की चाट, छोले भटूरे और कुलचे, पिज्जा, कचौड़ी, पराठा, दाल बाफला, भुट्टे का कीज, चाय, पालक पूड़ी, मिठाई में आपको खाने के लिए जलेबी, गुलाब जामुन, छेना, मालपुआ, बर्फी, लस्सी, कुल्फी आसानी से किसी भी होटल और रेस्टोरेंट में मिल जायेंगे।

 

FAQs

1. भोपाल का पुराना नाम क्या था?

भोपाल का प्राचीन नाम भूपाल था। कुछ लोगों का मत है भोपाल का नाम राजा भूपाल शाह के नाम पर इस शहर का नाम भोपाल पड़ा।

2. भोपाल घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

भोपाल घूमने के लिए सबसे अच्छा समय सितंबर से लेकर मार्च तक माना जाता है। इस महीनो के बीच भोपाल का मौसम सुहावना होता है। जिसमे घूमने पर किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती है।

3. भोपाल में कौन सा हवाई अड्डा है?

भोपाल शहर से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर राजा भोज हवाई अड्डे स्थित है।

4. भोपाल में कितने जिले हैं?

वर्तमान में भोपाल में कुल 52 जिले हैं।


निष्कर्ष (Conclusion)

प्रिय पाठक लेख को पढ़कर कैसा लगा भोपाल में घूमने की जगह (Bhopal Me Ghumne Ki Jagah) के बारे में जानकर जरूर बताएं। वीकेंड में परिवार और बच्चों के साथ घूमने के लिए भोपाल शहर बहुत ही अच्छा है जहां घूमने के साथ मार्केट में शॉपिंग करते हुए क्षेत्रीय भोजन का स्वाद उठा सकते हैं।
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