नलिया (गुजरात) के आसपास घूमने की जगह | Tourist places in Naliya
गुजरात राज्य अपनी संस्कृति और मीठी भाषा के लिए जाना जाता है। गुजरात का गरबा नृत्य पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। गुजरात में कभी रण का कच्च देखने का मौका मिले को जरूर घूमने का प्लान बना सकते हैं। इस लेख में कच्च जिले के आसपास घूमने योग्य पर्यटन स्थलों का विवरण किया है। लेख में नलिया (गुजरात) के आसपास घूमने की जगह | Tourist places in Naliya के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी हासिल कर सकते हैं।
नलिया में घूमने की जगह | Tourist Places in Naliya
1. मांडवी (Mandvi)
समुद्री के किनारे सोने के रंग की तरह चमकने वाली रेत में घूमने के मजा लेना चाहते हैं तो चले आइए मांडवी के प्राकृतिक समुद्री तट पर मांडवी गुजरात राज्य के कच्च जिले का शहर है। यह शहर अपने ऐतिहासिक संस्कृति और सभ्यता के लिए जाना जाता है। मांडवी भुज शहर से 60 किमी की दूरी पर है। एक घंटे के यात्रा में आसानी से पहुंचा जा सकता है। मांडवी में रुकने के लिए बहुत से होटल हैं जहां पर रुक कर समुद्री तट का शानदार नजारा देखने को मिलता है। मांडवी के प्राकृतिक समुद्री तटों पर समय बिताने के लिए सबसे अच्छा समय साप्ताहिक रहता है। सप्ताह के दिनों में लोगों का बड़ी संख्या में आवागमन होता रहता है।
2. माता नो मढ़ (Mata no Madh)
माता नो मढ़ एक पवित्र धार्मिक स्थान है जो अपनी आस्था के लिए जाना जाता है। माता नो मढ़ गुजरात के लखपत जिले का एक गांव है जहां माता का प्राचीन मंदिर स्थापित किया गया है। मंदिर में दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त जाते हैं और माता के दरवार में अपनी अर्जी लगाते हैं। भुज शहर से मंदिर 105 किमी की दूरी पर है।
3. लाला परजन अभ्यारण (Lala Parjan Sanctuary)
पक्षियों की दुनियां की सैर करना चाहते हैं तो लाला परजन अभ्यारण एक महत्वपूर्ण भ्रमण स्थान है। यह अभ्यारण भारत में पाई जाने वाली दुर्लभ पक्षी जिसे गोडावण (The Great Indian Bustard) नाम से जाना जाता है उसको संरक्षित करने के लिए बनाया गया था। गोडावण चिड़िया को सोन चिड़िया नाम से भी जाना जाता है। यह अभ्यारण कच्च जिले के नलिया नामक गांव के पास स्थित है। नलिया गांव से अभ्यारण की दूरी लगभग 30 किमी है।
4. पिंगलेश्वर (Pingleshwar)
धार्मिक स्थल और प्राकृतिक समुद्री वातावरण का मिला जुला स्थान जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। समुद्र तट के किनारे स्थित पिंगलेश्वर महादेव मंदिर अपनी आस्था और आध्यात्मिक शक्ति के लिए जाना जाता है। प्रत्येक वर्ष महा शिवरात्रि के पावन दिन पर भक्तों की बड़ी संख्या में लंबी कतारें देखने को मिलती है। मंदिर प्रांगण पूरी तरह भक्तों से भर जाता है। मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करने के बाद अरेबियन समुद्र तट पर समय बिताने और फोटोग्राफी के लिए बेहद उचित जगह है। लेकिन समुद्र तट पर समय व्यतीत करने की समय सीमा है शाम 6 बजे के बाद घूमने की अनुमति नहीं रहती है। पिंगलेश्वर कच्च जिले के रापर गढ़ क्षेत्र में पड़ता है। नलिया से पिंगलेश्वर 28 किमी की दूरी पर है।
5. कोटेश्वर (Koteshwar)
भारत के पश्चिमी क्षेत्र का अद्भुत धार्मिक स्थल जो अपनी आस्था की कहानी बयां करता है। हिन्दू पौराणिक मान्यता के अनुसार कोटेश्वर का मतलब होता है "दस करोड़ देवताओं के स्वामी" कहते हैं भगवान शिव जी रावण को शिवलिंग उपहार में दिया था। बाद में रावण ने शिवलिंग को इसी पवित्र स्थान पर गिरा दिया था जिससे शिवलिंग लाखों की संख्या में विभाजित होकर गिर गया और उसी के चारों तरफ मंदिर का निर्माण हुआ।
6. कालो डूंगर (Kalo Dungar)
कच्च जिले मे 463 मीटर की काली पहाड़ी जिसे कालो डूंगर के नाम से जाना जाता है। यह पहाड़ियां कच्च के ख़ावडा के पास स्थित हैं। पहाड़ियों से सूर्योदय और सूर्यास्त के समय बेहद खूबसूरत नजारा देखने लायक रहता है।
7. विजय विलास महल (Vijay Vilas Palace)
ऐतिहासिक धरोहर विजय विलास महल अपनी शाही बनावट अद्भुत कारीगरी के लिए प्रसिद्ध है। महल का निर्माण 1929 में महाराजा महाराव श्री खेंगरजी तृतीय ने अपने पुत्र युवराज विजय राज जी के लिए उपहार में देने के लिए बनवाया था। महल की रूपरेखा में राजपूताना शैली और मुगल वास्तुकला दोनों का मिला जुला प्रभाव देखने को मिलता है। यह धरोहर मांडवी में समुद्र के पास स्थित है। महल का निर्माण तीन खंड में बनाया गया है। महल के अंदर शाही तलवार शाही कपड़े और बहुत सी शाही विरासत की झलक देखने को मिलती है। महल की ख्याति दूर दूर तक प्रसिद्ध है जिससे बहुत सी फिल्मों की शूटिंग भी की जा चुकी है। शाही विरासत को देखने के लिए टिकट लगता है।
